हिन्दी भाषा का विकास क्रम: अपभ्रंश से हिन्दी तक का सफर | UPSI Hindi
हिन्दी का प्रत्यक्ष स्रोत क्या है? जानें संस्कृत, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश का इतिहास। भारतीय आर्य भाषाओं के विकास क्रम को याद रखने की सबसे आसान ट्रिक।
🔹 प्रश्न / Question
भारतीय आर्य भाषाओं (Indo-Aryan Languages / इंडो-आर्य भाषाएँ) के इतिहास में किस भाषा को हिन्दी तथा अन्य आधुनिक आर्य भाषाओं का प्रत्यक्ष स्रोत माना जाता है?
भारतीय आर्य भाषाओं (Indo-Aryan Languages / इंडो-आर्य भाषाएँ) के इतिहास में किस भाषा को हिन्दी तथा अन्य आधुनिक आर्य भाषाओं का प्रत्यक्ष स्रोत माना जाता है?
विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation)
हिन्दी भाषा का विकास क्रम (Evolutionary Sequence of Hindi Language):
भारतीय आर्य भाषाओं (Indo-Aryan Languages) का इतिहास एक बहती हुई नदी की तरह है, जो समय के साथ अपना रूप बदलती रही। इसका सही क्रम इस प्रकार है:
- 1. संस्कृत (Sanskrit) [1500 ई.पू. - 500 ई.पू.] - इसे सभी भाषाओं की 'जननी' (Mother) कहा जाता है।
- 2. पालि (Pali) [500 ई.पू. - 1 ईस्वी] - यह भगवान बुद्ध (Lord Buddha) के उपदेशों की भाषा थी।
- 3. प्राकृत (Prakrit) [1 ईस्वी - 500 ईस्वी] - यह जैन तीर्थंकरों (Jain Tirthankaras) की भाषा थी।
- 4. अपभ्रंश (Apabhramsha) [500 ईस्वी - 1000 ईस्वी] - यह वह कड़ी है जिससे आधुनिक भाषाएँ निकलीं।
- 5. हिन्दी (Hindi) और अन्य आधुनिक भाषाएँ [1000 ईस्वी से अब तक]।
याद रखने की ट्रिक (Trick to Remember)
इस क्रम को याद रखने के लिए एक छोटा सा वाक्य (Sentence) याद रखें:
"सं-पा-प्रा-अ-हि"
• सं - संस्कृत (Sanskrit)
• पा - पालि (Pali)
• प्रा - प्राकृत (Prakrit)
• अ - अपभ्रंश (Apabhramsha) —> (हिन्दी का पिता)
• हि - हिन्दी (Hindi)
"सं-पा-प्रा-अ-हि"
• सं - संस्कृत (Sanskrit)
• पा - पालि (Pali)
• प्रा - प्राकृत (Prakrit)
• अ - अपभ्रंश (Apabhramsha) —> (हिन्दी का पिता)
• हि - हिन्दी (Hindi)
Short Trick: "संस्कृत से निकली पालि, पालि से प्राकृत आई, प्राकृत से जब 'अपभ्रंश' बिगड़ा, तब हिन्दी मुस्काई।"
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