हिन्दी साहित्य का इतिहास: आचार्य शुक्ल और 'हिन्दी शब्द सागर' का संबंध

क्या आप जानते हैं आचार्य रामचंद्र शुक्ल का 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' मूलतः एक भूमिका थी? जानें इसके 1929 ई. में प्रकाशन और
हिन्दी साहित्य का इतिहास - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
📘 प्रश्न (Question)
मूलतः 'हिन्दी शब्द सागर' की भूमिका के रूप में लिखी गई रचना, जिसे बाद में स्वतन्त्र ग्रन्थ बनाया गया—कौन-सी है?
  • (a) रामकुमार वर्मा कृत 'हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास'
  • (b) गणपतिचन्द्र गुप्त कृत 'हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास'
  • (c) रामचन्द्र शुक्ल कृत 'हिन्दी साहित्य का इतिहास'
  • (d) शिवसिंह सेंगर कृत 'शिवसिंह सरोज'
✅ सही उत्तर (Correct Answer)
👉 (c) रामचन्द्र शुक्ल (Ramchandra Shukla) कृत 'हिन्दी साहित्य का इतिहास'

यह हिन्दी साहित्य का सबसे प्रामाणिक और महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना जाता है। आइए, इसे विस्तार से और बहुत ही सरल भाषा में समझते हैं:

विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation)

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (Acharya Ramchandra Shukla) ने मूल रूप से इस ग्रन्थ को एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में नहीं लिखा था।

1. भूमिका के रूप में (As a Preface): काशी (Kashi) की प्रसिद्ध संस्था 'नागरी प्रचारिणी सभा' (Nagari Pracharini Sabha) द्वारा 'हिन्दी शब्द सागर' (Hindi Shabda Sagar)—जो कि एक विशाल शब्दकोश (Dictionary) है—का संपादन किया जा रहा था। शुक्ल जी ने इसकी भूमिका (Introduction) के रूप में 'हिन्दी साहित्य का विकास' (Hindi Sahitya ka Vikas) नाम से एक लेख लिखा।

2. ग्रन्थ के रूप में (As a Book): बाद में, इस भूमिका को बहुत अधिक विस्तार देकर और परिष्कृत करके 1929 ईस्वी (1929 AD) में 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' (Hindi Sahitya ka Itihas) के नाम से एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया।

सभी विकल्पों का विश्लेषण (Analysis of All Options)

  • (a) रामकुमार वर्मा (Ramkumar Verma) कृत 'हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास': यह ग्रन्थ 1938 ईस्वी में लिखा गया था। यह अधूरा है क्योंकि इसमें केवल भक्ति काल तक का ही वर्णन है।
  • (b) गणपतिचन्द्र गुप्त (Ganpati Chandra Gupta) कृत 'हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास': यह 1965 ईस्वी में प्रकाशित हुआ और इसमें साहित्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परखने का प्रयास किया गया।
  • (c) रामचन्द्र शुक्ल (Ramchandra Shukla) कृत 'हिन्दी साहित्य का इतिहास': यही वह ग्रन्थ है जो पहले 'हिन्दी शब्द सागर' की भूमिका थी। (सही उत्तर)
  • (d) शिवसिंह सेंगर (Shiv Singh Sengar) कृत 'शिवसिंह सरोज': यह 1883 ईस्वी में लिखा गया था और इसे हिन्दी भाषा में लिखा गया पहला इतिहास ग्रन्थ माना जाता है।

कहानी और उदाहरण से समझिए (Understand with Story & Example)

कहानी (Story):
कल्पना कीजिए कि एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी (Library) बन रही है जिसका नाम है 'हिन्दी शब्द सागर' (Hindi Shabda Sagar)। इस लाइब्रेरी के उद्घाटन के लिए रामचन्द्र शुक्ल (Ramchandra Shukla) को एक छोटा सा भाषण (भूमिका) लिखने को कहा गया।

शुक्ल जी ने जब लिखना शुरू किया, तो वह भाषण इतना शानदार और जानकारी से भरपूर था कि लोगों ने कहा— "शुक्ल जी, इसे भाषण तक सीमित मत रखिए, इसे तो एक पूरी किताब बना दीजिए!"

बस, उसी 'भाषण' (भूमिका) ने आगे चलकर 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' (History of Hindi Literature) का रूप ले लिया।
ट्रिक (Trick to Remember):

"सागर (Shabda Sagar) के किनारे बैठकर 'शुक्ल' (Shukla) जी ने 'इतिहास' (History) लिखा।"

यहाँ सागर से 'हिन्दी शब्द सागर' और शुक्ल से 'रामचन्द्र शुक्ल' याद रहेंगे।